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कम्प्यूटर के महत्व पर निबंध
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प्रस्तावना:- आवश्यकता आविष्कार की जननी है। अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए ही आज तक मनुष्य हमेशा से नवीनतम आविष्कारो को सफल बनाता आया है। मनुष्य ने विज्ञान की सहायता से द्रुतगामी आवागमन के साधनों को बना लिया है। मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधाओं को पूरा करने के लिए प्रकृतिक साधनों का दोहन कर उन्हें अपने अनुचर बना लिया है। विज्ञान ने मनुष्य को असज तक बहुत प्रकार की दुविधाये उपलब्ध कराई है। उन सारी सुविधाओं में कम्प्यूटर का एक विशेष स्थान है। कम्प्यूटर की सहायता से हर काम को अभिलंब किया जा सकता है।
यह विज्ञान की एक महान देन है। तो सभी लोगो को यह याद अवश्य रखना चाहिए कम्प्यूटर क्या है ? और यह कैसे काम करता है? कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक यन्त्र है कम्प्यूटर एक जिज्ञासा उतपन्न होने वाला स्वभाविक यन्त्र है। कम्यूटर एक ऐसे यांत्रिक मस्तिष्क का रूपात्मक समन्वयक योग और गुणात्मक घनत्व है। जो तेज गति से कम से कम समय मे ज्यादा से ज्यादा काम कर सकता है।
भारत मे कम्प्यूटर का अरम्भ:- हमारे देश मे सर्वप्रथम 1961 में कम्प्यूटर का प्रयोग शुरू हुआ किंतु राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीत्व काल (1984-1989) के दौरान विविध क्षेत्रों में कम्प्यूटर का जिस बड़े पैमाने पर प्रचलन बढ़ा उसे मद्देनजर रख पर्यवेक्षको ने उनके कार्यकाल को कम्प्यूटर क्रांति की संज्ञा दी।
लेखन तथा गणना के क्षेत्र में विगत पाँच दशकों में आश्चर्यजनक प्रगति हुई है। कम्प्यूटर भी इन्ही आश्चर्यजनक आविष्कार में से एक है। कम्प्यूटर शब्द को हिंदी भाषा मे शामिल कर लिया गया है। वैसे इसका हिंदी पर्याय कामिल बुल्के ने अपने अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश में दिया है।आज दफ्तरों, स्टेशनों, घड़ी के कम्पनियो ,टेलीफोन एक्सचेंजो आदि अन्य अनेक ऐसे कल कारखनो में जहां गणना करने अथवा काफी मात्रा में छपाई का काम करने की जरूरत होती है। वहाँ भी कम्प्यूटर लगाए गए है ताकि कर्मचारियों की संख्या में कटौती की जा सके। कम्प्यूटर अब वह काम भी करने लगे है जो मानव के लिए काफी श्रम साध्य तथा समय लेने वाले है।
कम्प्यूटर का इतिहास:- कम्प्यूटर की पहली परिकल्पना सन 1642 में साकार हुई जब जर्मन वैज्ञानिक ब्लेज़ पास्कल ने संसार का पहला सरल कम्प्यूटर तैयार किया है। इस कम्प्यूटर में ऐसी खास जटिलता नही थी फिर भी अपने समय मे यह आम लोंगो के लिए एक कौतूहल का विषय अवश्य था। समय बिता ओर अन्य लोग भी इस पीटारेनुमा कम्प्यूटर से प्रभावित ओर उत्साहित हुए। सन1680 में जर्मनी में ही विलियम लेबनिटज ने एक ऐसे गणना यन्त्र का आविष्कार किया जिसके माध्यम से जोड़, घटा, गुणा, भाग ओर वर्गमूल तक निकाले जा सकते थे। खोज का काम नही रुका, यह कभी चला, कभी आगे बढ़ा और सन 1801 में उक्त मशीन से प्रेरित होकर जोजेफ एम.जाकवार्ड ने एक ऐसा करघा यन्त्र बनाया जिससे कम्प्यूटर के विकास को काफी सहायता मिली। वर्तमान कम्प्यूटर डॉ. हरमन के प्रयासों का अति आधुनिक विकसित रूप है।
कम्प्यूटर का प्रयोग:- कम्प्यूटर का निरंतर विकास हो रहा है। ई.सी.जी. रोबोट, मानसिक कम्पन , रक्तचाप तथा न जाने कितने जीवन -रक्षक कार्यो के लिए कम्प्यूटर का उपयोग किया जाता है। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस, हालेंड, स्वीडन, ग्रेट बिट्रेन जैसे सम्रद्ध देशों में इसका स्थान मनुष्य के दूसरे दिमाग के रूप में माना जाता है। भारत मे भी कम्प्यूटर विज्ञान की निरंतर प्रगति होती जा रही है। शायद वह दिन् दूर नही जब भारत भी इस क्षेत्रो में ओर अधिक अन्य देशों से बराबरी करने लगेगा वेसे तो हमारा भारत देश अब किसी देश से कम्प्यूटर के कार्य मे पिछड़ा हुआ नही है।
आज कम्प्यूटर के विविध तथा बहुक्षेत्रीय उपयोग हो रहे है। भारत मे कम्प्यूटर कितने लाभप्रद तथा कितने अलाभकारी है। इस पर विचार करना जरूरी है। यह बात तो हमें स्वीकार कर ही लेनी चाहिए कि कम्प्यूटर भी मानव निर्मित उपकरण है। जिसमे आंकड़े, सूचनाएं, अंक, हिसाब-किताब आदि मानव के द्वारा ही भरे जाते है। अतः मानव से कोई त्रुटि हो जाए तो वह कम्प्यूटर में बार-बार तब तक होती रहेगी जब तक वह सुधारी न जाये। अतः यह कहना कि कम्प्यूटर गलती नहीँ करता, एक गमभीर तथ्य को स्वीकार करना है। भारत जैसा विकासशील देश भी विविध क्षेत्रों में कम्प्यूटर का उपयोग करने लगा है। इससे उन सभी क्षेत्रों में उत्पादकता व कार्यकुशलता बढ़ी है। इन क्षेत्रों में विज्ञान, शिक्षा, व्यवसाय, सूचना, प्रोधोगिकी आदि प्रमुख है।
हमारा देश विकासशील देश है जहां प्रतिवर्ष हजारों नही लाखो की संख्या में बेकार युवक बढ़ते जा रहे है। कम्प्यूटर का बहुक्षेत्रीय उपयोग मानव मस्तिष्क को पंगु बना देता है और उसे अपने कार्य मे सहज निरंतर प्रगति करते रहने की भावना में बाधा डालता है। ऐसा देखने मे आया है कि निरंतर हिसाब-किताब था ड्राफ्टिंग करने वाले लोग मिनटों में बड़े-बड़े हिसाब-किताब हल कर डालते है। ऐसा वे अपने निरंतर अभ्यास के बल पर करते है। गणित से सम्बद्ध कार्यो, ड्राफ्टिंग तथा अन्य क्षेत्रों में अनुभवी लोगो के करिश्मे आये दिन अखबारों में पढ़ने को मिलते है। कम्प्यूटरीकृत इन सब प्रगति के लिए बाधक ओर भयावह है।
उपसंहार:- विज्ञान के उपहारों को नकारना आज के युग मे सम्भव नही है। इसलिए कम्प्यूटरीकृत भी आज समय की मांग बन चुका है। भारत मे लगभग सभी निजी व्यवसायिक संस्थानों, बैंकों, कई सरकारी संस्थानों व सेवाओं को कम्प्यूटरीकृत किया जा चुका है। भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।






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