23/02/2021  :  16:50 HH:MM
अपूर्वी चंदेला ओलंपिक में जीत के लिए तैयार
Total View  85
 
 


अपूर्वी चंदेला ने साल 2019 में दस मीटर एयर राइफल श्रेणी में आईएसएसफ वर्ल्ड चैंपियन जीता था। लेकिन ओलंपिक में उनकी शुरुआत यादगार नहीं रही थी। साल 2016 में अपूर्वी ने रियो ओलंपिक में शुरुआत की थी। किन वह अपनी अपेक्षाओं के ताबिक़, प्रदर्शन नहीं कर सकीं। अपूर्वी कहती हैं कि ओलंपिक का अनुभव उनके लिए एक अच्छी सीख रहा। ओलंपिक से सबक़ लेकर अपूर्वी ने एक नई शुरुआत की और साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद अगला साल अपूर्वी के लिए और भी ख़ास रहा। क्योंकि अपूर्वी ने दिल्ली में आयोजित हुए आईएसएसएफ़ विश्व कप फ़ाइनल में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए जीत हासिल की। इस जीत ने साल 2021 में आयोजित होने जा रहे टोक्यो ओलंपिक में भी उनकी जगह पक्की कर दी। साल 2016 में अर्जुन अवॉर्ड जीतने वालीं अपूर्वी ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं. वह कहती हैं कि वह अपने अनुभव के साथ टोक्यो में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।

परिवार के सहयोग की अहम भूमिका

शूटिंग एक खर्चीला खेल हैं लेकिन जयपुर में रहने वाले चंदेला परिवार ने अपने संसाधनों का इस्तेमाल करके बेटी के लिए खेलना मुमकिन बनाया। अपूर्वी की माँ बिंदू एक बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं और उनके कज़िन्स भी शूटिंग से जुड़े थे। बचपन से ही खेल के मुद्दे पर बात करने वाली अपूर्वी बचपन में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बनना चाहती थीं। लेकिन 2008 में बीजिंग ओलंपिक के दौरान अभिनव बिंद्रा के गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह स्वयं खेल की दुनिया में उतरने के लिए तैयार हुईं। बिंद्रा की जीत ने पूरे भारत को ख़ुश होने का मौक़ा दिया और इससे अपूर्वी भी बंदूक उठाने के लिए तैयार हुईं। चंदेला परिवार शुरुआत से ही बच्ची के साथ था। शूटिंग में बच्ची का रुझान देखकर उनके पिता कुलदीप सिंह चंदेला ने अपूर्वी को एक राइफल तोहफे में दी। और इस तरह अपूर्वी का शूटिंग की दुनिया में सफर शुरू हुआ।

माँ का साथ

अपनी ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में, अपूर्वी चंदेला को नज़दीकी शूटिंग रेंज तक पहुंचने में 45 मिनट का समय लगा करता था। जब उनके घर वालों को पता चला कि शूटिंग रेंज तक जाने आने में काफ़ी समय लगता है तो उन्होंने अपने घर पर ही शूटिंग रेंज बना ली। अपूर्वी के पिता उनके खेल से जुड़े आर्थिक मसलों का ध्यान रखते हैं, वहीं उनकी माँ अपूर्वी के ट्रेनिंग सेशन और टूर्नामेंट में लगातार साथ रहती हैं। अपूर्वी कहती हैं कि उनकी माँ की मौजूदगी उन्हें ताक़त देती है। अपूर्वी ने साल 2009 में इंडिया स्कूल शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद दस मीटर एयर राइफल शूटिंग श्रेणी में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जीतने में उन्हें सिर्फ़ तीन साल लगे। साल 2012 से 2019 के बीच अपूर्वी ने छह बार नेशनल चैंपियनशिप जीती. इसके साथ ही वह लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ती रहीं। अपूर्वी की सबसे शानदार मेडलों में से ग्लास्गो में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में जीता गोल्ड मेडल है। वह कहती हैं कि वह जीत उनके लिए हमेशा अहम रहेगी क्योंकि उस मौके पर उनके घर के 14 लोग वहां मौजूद थे।






Enter the following fields. All fields are mandatory:-
Name :  
  
Email :  
  
Comments  
  
Security Key :  
   9522906
 
     
Related Links :-
ओडीशा में बनेगा भारत का सबसे बड़ा हाॅकी स्टेडियम, 20 हजार दर्शक एक साथ देख सकेंगे लाइव मैच.
अपूर्वी चंदेला ओलंपिक में जीत के लिए तैयार
ईशा सिंह: निशानेबाज़ी में भारत की सबसे कम उम्र की चैंपियन
मंजू रानीः वो मुक्केबाज़ जिनके पास दस्ताने ख़रीदने तक के पैसे नहीं थे…
ऑटिज़्म पीड़ित जिया राय ने अरब सागर में रचा कीर्तिमान
अनीता देवी: पुलिस कॉन्स्टेबल बनने से लेकर मेडल जीतने तक का सफ़र
 
CopyRight 2016 Rashtriyabalvikas.com